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पहली बार निर्यात आंकड़ा पंहुचा 10000 हजार करोड़ के पार –पढ़े कारपेट कोम्पक्ट का नया अंक ;

कालीन निर्यात संवर्धन परिषद् के चुनाव में आज सभी ६ सदस्यों को निर्विरोध निर्वाचन | उत्तर प्रदेश से प्रथम उपाध्यक्ष सिद्धनाथ सिंह और तीन सदस्य में अब्दुल रब जफर हुसैनी, राजेंद्र मिश्र ,और जम्मू कश्मीर से सेकेंड उपाध्यक्ष उमर हमीद सहित एक सदस्य पप्पू वाटल और रेस्ट ऑफ़ इंडिया से बोधराज मल्होत्रा ||Amendment In Duty Drawback Rates On Carpets And Other Floor Coverings Of Man Made Fibres For The Year 2016-17 Effective From 15th January, 2017. ,,सीईपीसी के चुनाव की सरगर्मी बढ़ी ,,डोमोटेक्स में सम्मानित भदोही के नुमान वजीरी से मिले मुख्यमंत्री || DOMOTEX - दो भारतीय कालीनों को मिला बेस्ट पानीपत में विशेष कारपेट कलस्टर स्थापित होगा : स्मृति || कि अब तक पानीपत के DOMOTEX 2017 Winners of the Carpet DOMOTEX 2017 AFTER REPORT - puts fresh wind in the sails of the global floor coverings industryDesign Awardsडिजाईन अवार्डत्री
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छह डाइंग प्लांट को केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने किया सीज

दो डाइंग प्लांट पर पहले ही हो चुकी है कार्यवाई
तय किये गए मानक पर प्लांट नही किये जा रहे थे संचालित 
भदोही। कालीन नगरी भदोही के छह डाइंग प्लांट को केंद्रीय प्रदूषण नियन्त्र बोर्ड और प्रशासन ने सीज कर दिया है। सभी प्लांट तय किये गए मानकों पर संचालित नही हो रहे थे जिस पर बोर्ड द्वारा उन्हें पहले ही आधुनिक सुविधाओं से लैस डाइंग सिस्टम के उपयोग की नोटिस देते हुए प्लांटो को बंद करने का निर्देश दिया था। पूर्व में भी दो डाइंग प्लांट पर भी सीज की कार्यवाई की जा चुकी है। 
भदोही पहुंची केंद्रीय प्रदूषण बोर्ड के वैज्ञानिक सुरेश चंद्र व एसडीएम आशीष कुमार ने इस मामले में कार्यवाई करते हुए भदोही कोतवाली क्षेत्र के जाहिदपुर स्थित आर आर डायर्स, कार्पेट सिटी स्थित रूपेश एन्ड ब्रदर्स, भदोही कार्पेट, दीपक कार्पेट व हिम्मतपुर बकुचिया स्थित एआरएस डाइंग प्लांट सीज कर दिया। वहीं औराई के माधोसिंह खमरिया स्थित जय बजरंग डाइंग प्लांट को सीज किया गया है। पूर्व में भी औराई छेत्र के एक व गोपीगंज के एक डाइंग प्लांटो को सीज किया जा चुका है। यह सभी कार्यवाईयाँ पर्यावरण संरक्षण अधिनियम के तहत किया गया। पूर्व में सभी डाइंग प्लांटो को नोटिस दिया गया था कि वे आधुनिक सुविधाओं से युक्त ईटीपी सिस्टम का उपयोग कर प्लांट संचालित करें। जब तक मानक के तहत प्लांट संचालित न हो तब तक उसे बंद रखा जाय। इस निर्देश के बाद कई प्लांट बन्द हो चुके थे लेकिन कई धड़ल्ले से चल रहे थे। इसे लेकर बोर्ड ने मई-जून में निरीक्षण कर जिले के आठ डाइंग प्लांटो को चिन्हित किया गया था जो तय मानक पूरा न करने के बाद भी संचालित हो रहे थे। उन प्लांट को सीज कर दिया गया।
वहीं इस तरह की कार्यवाई पर प्लांट मालिको ने रोष जताया और कहा है कि उन्हें मनको को पूरा करने के लिए समय मिलना चाहिए था

GST के विरोध में कालीन उद्योग निकलेगा मार्च 

विरोध में तेजी से एकजुट हो रहे कालीन निर्यातक

बुनकरों मजदूरों पर 18 फीसदी टैक्स पर उद्योग में विरोध

भदोही। जीएसटी को लेकर जहां देश भर में कपड़ा व्यापारी विरोध में हैं तो वहीं कालीन उद्योग में भी बुनकरों मजदूरों पर लगाये गए 18 फीसदी टैक्स का विरोध हो रहा है। सरकार द्वारा जीएसटी न हटाये जाने पर कालीन उद्योग ने विरोध में मार्च निकलने पर विचार किया है। 19 जुलाई को अखिल भारतीय कालीन निर्माता संघ के आह्वान पर कालीन निर्यातक भदोही शहर में कालीन भवन से तहसील तक विरोध मार्च निकलेंगे। 

इसे लेकर अखिल भारतीय कालीन निर्माता संघ की एक बैठक हुई जिसमें उद्योग के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। बैठक में कालीन निर्माण की प्रक्रिया से जुड़े बुनकरों एवं मजदूरों पर 18 फीसदी की दर से आरोपित जीएसटी पर चिंता व्यक्त की गई। बैठक में निर्णय लिया गया कि बुनकरों, कारीगरों, मजदूरों पर जीएसटी वापस नही लिया गया तो उद्योग समाप्त हो जाएगा। ऐसे में उद्योग को बचाने के लिए जीएसटी के विरोध में मर्यादपट्टी स्थित कालीन भवन से भदोही तहसील तक निर्यातक मार्च निकलेंगे। 

इस विरोध मार्च को लेकर कालीन उद्योग से जुड़े कालीन निर्यातक एकजुट हो रहे हैं। गौरतलब हो कि अभी तक तमाम मुद्दों का हल बैठकों से ही निकल जाता था लेकिन जीएसटी के कारण ऐसी स्थिति आ गयी है कि निर्यातकों को विरोध में मार्च का सहारा लेना पड़ रहा है। पहली बार युवा कालीन निर्यातक इस मुद्दे को लेकर एकजुट हैं और यह विरोध सोशल मीडिया से लेकर कालीन नगरी के गलियों में देखने को मिल रही है। विरोध में जगह-जगह बैनर पोस्टर भी लगा दिए गए हैं। ऐसे में जानकारों की माने तो इस मुद्दे पर सरकार को कालीन उद्योग के ऐसा कदम उठाया जाना चाहिए जिससे उद्योग को इस भारी-भरकम टैक्स से मुक्ति मिल सके। देश से दस हजार करोड़ के कालीनों का विदेशो में निर्यात हो रहा है जिसमे कालीन निर्यातकों का दावा है कि इसमें आधे से अधिक हिस्सा भदोही का होता है। इस उद्योग से बड़ी संख्या में लोगो को रोजगार मिला है और ऐसे में बुनकरों-मजदूरों पर जीएसटी थोपने से उद्योग का बड़ा नुकसान हो सकता है क्योंकि कालीन का कार्य गाँवो में इसे कुटीर उद्योग के रूप में किया जाता है।

पाक सरकार कर रही कालीन उद्योग को बढ़ाने की पहल


कालीन उद्योग में पड़ोसी देशों से आगे बढ़ने की तैयारी
पाक इण्टरनेशनल कारपेट फेयर के लिए सात करोड़ से अधिक
लाहौर। पाकिस्तान सरकार जल्द ही एक्सपोर्ट फोकस इण्डस्ट्री के लिए विशेष पैकेज की घोषणा करेंगे। वहां के उद्योग मंत्री पाकिस्तानी कालीन मेले के दौरान कहा कि जल्द ही कालीन उद्योग में दरों में कमी लाने के लिए टैरिफ और टैक्स सहित बिजली के दरों में •ाी कमी लायी जायेगी जिससे पाकिस्तानी कालीन उद्योग आस-पास के देशों का मुकबला कर सके। उन्होने अन्तार्राष्ट्रीय व्यापार के लिए कारपेट फेयरों को कारगर बताया। उन्होने ने कहा कि हैण्डनाटेड कारपेट इण्डस्ट्री की समस्या के समाधान के लिए डब्लूटीओ के अन्तर्गत आने वाले समस्याओं को सुलझाया जायेगा। इसमें फ्रीटेÑेड एग्रीमेंट, प्रोडक्ट डेवलपमेंट और रिसर्च को बढ़ावा दिया जायेगा। पाकिस्तानी कारपेट मैनुफैक्चररर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष ने सरकार से मांग की है कि कालीन उद्योग का अंतर्राष्ट्रीय इमेज में सुधार किया जाय जिससे बायर पाकिस्तान में अधिक आएं। पाकिस्तान के सूचना सांस्कृतिक व उद्योग मंत्री ने कहा कि पाकिस्तान दुनिया में अच्छी इमेज बनाना चाह रहा है और पाकिस्तानी निर्यातकों को शंघाई और डोमोटेक्स के अलावा लगने वाले मेले में •ाी •ााग लेने के लिए सहयोग किया जायेगा। उन्होने बताया कि पाकिस्तान में लगने वाले 33 वें इण्टरनेशनल कारपेट फेयर के लिए पाक सरकार ने 07 करोड़ 50 लाख का बजट दिया है। 

चीन और ऑस्‍ट्रेलि‍या की ओर चले भारत के कारपेट निर्माता, नए बाजार की तलाश में इंडस्‍ट्री


नई दिल्‍ली। यूरोप और रूस से घटते निर्यात से परेशान भारतीय हैंड-मेड कारपेट इंडस्‍ट्री ने अब नए बाजारों की तलाश शुरू कर दी है। इंडस्‍ट्री का फोकस चीन, ऑस्‍ट्रेलिया और दक्षिण अमेरिकी देशों की ओर है, जहां इंडस्‍ट्री को बेहतर डिमांड के साथ कारोबारी मौके हासिल हो रहे हैं। हालांकि यहां मुकाबला मशीन मेड कारपेट और फ्लोरिंग से है। जिनकी कीमत हैंड मेड कारपेट के मुकाबले 40 से 50 फीसदी कम हैं। ऐसे में पुराने मार्केट पर पकड़ बनाने के साथ कारोबारी नए मार्केट पर काबिज होने के लिए प्रॉडक्‍ट रेंज में बदलाव कर रहे हैं। कारोबारियों के अनुसार यूरोप, रूस और अमेरिका से हैंडमेड कारपेट एक्‍सपोर्ट डिमांड इस साल 20 से 30 फीसदी तक गिरी है। लेकिन नए मार्केट में भारतीय कालीन की डिमांड जिस तेजी से बढ़ रही है, उसे देखते हुए संभव है कि इंडस्‍ट्री पश्चिम में हुए नुकसान की भरपाई कर सके।
यूएस और यूरोप के बाद नए बाजार की तलाश
कारपेट एक्‍सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल के वाइस चेयरमैन मुकेश कुमार गुम्‍बर के अनुसार भारतीय कारपेट इंडस्‍ट्री फिलहाल अमेरिका और यूरोप पर निर्भर है। दुनिया के कारपेट बाजार में 35 फीसदी की हिस्‍सेदारी रखने वाले भारत के कुल एक्‍सपोर्ट में इन देशों की हिस्‍सेदारी 60 फीसदी से भी अधिक है। लेकिन यूरोप में आर्थिक मंदी के चलते निर्यात को काफी नुकसान पहुंचा है। वहीं ईरान, पाकिस्‍तान और नेपाल से भी देश को कड़ी टक्‍कर मिल रही है। इसके अतिरिक्‍त चीन और टर्की के मशीन मेड कारपेट भी भारतीय कालीन का बाजार छीन रहे हैं। ऐसे में काउंसिल भी नए बाजार तलाश रही है। निर्यातक लैटिन अमेरिकी और मिडिल ईस्‍ट देशों, विशेषकर वेनेजुएला, पनामा, ब्राजील, यूएई, दुबई आदि पर ध्‍यान दे रहे हैं।हालांकि यह एक लंबी प्रक्रिया है। लेकिन इसका फायदा इंडस्‍ट्री को जरूर होगा।
कॉम्‍पटीटर के साथ कंज्‍यूमर बना चीन
जम्‍मू कश्‍मीर में बारामुला के एक्‍सपोर्टर और दीवान फैब्रिक के चेयरमैन अशरफ चिब बताते हैं कि मशीन से तैयार होने वाले कारपेट के बाजार में चीन दुनिया का सबसे बड़ा खिलाड़ी है। लेकिन इसके बाद भी भारतीय निर्माताओं के लिए चीन में बेहतर कारोबारी मौके बन रहे हैं। यहां वूलन व सिल्क मिश्रित कारपेट काफी पसंद किए जा रहे हैं। कश्‍मीर और राजस्‍थान से हर साल 200 से 300 करोड़ के कारपेट निर्यात किए जा रहे हैं।हालांकि चीन सरकार द्वारा लगाई गई इंपोर्ट ड्यूटी के चलते इंडस्‍ट्री को चीन में पैर जमाने में मुश्किल आ रही है। लेकिन फिर भी डिमांड को देखते हुए एक्‍सपोर्टर चीन में संभावनाएं तलाश रहे हैं।
नए बाजारों की मदद से इंडस्‍ट्री को मिली ग्रोथ
मिर्जापुर के कालीन कारोबारी मिर्जा इदरीस के मुताबिक लगातार नए बाजार की खोज इंडस्‍ट्री की पहली जरूरत है। हमें इसका फायदा भी मिल रहा है। कालीन निर्यात संवर्धन परिषद (सीईपीसी) लगातार देश में और भारत से बाहर बायर सेलर्स मीट का आयोजन कर रहा है। जिसके चलते इंडस्‍ट्री हर साल 10 से 15 फीसदी की दर से ग्रोथ कर रही है। सीईपीसी के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2009-10 में जहां 3,512.88 करोड़ रुपये का निर्यात किया गया वहीं यह 2012-13 के दौरान 6000 करोड़ पहुंच गया। मौजूदा दौर की बात की जाए तो भारत से हैंडमेड कार्पेट का निर्यात8000 हजार करोड़ रुपये तक पहुंच गया है।
मशीन से बने सस्‍ते कारपेट का बढ़ता बाजार
भदोही के कारपेट एक्‍सपोर्टर एसपी बंसल के अनुसार दुनिया भर में भारत, ईरान, पाकिस्‍तान ही हैंडमेड कालीन तैयार कर रहे हैं। हाथ से बना होने के चलते इसकी लागत अधिक आती है। वहीं चीन और टर्की जैसे देश मशीन से कालीन और फ्लोरिंग तैयार कर रहे हैं। जिनकी लागत बहुत कम आती है। इसे देखते हुए भारत में भी कई निर्माताओं ने मशीन से कारपेट तैयार करना शुरू कर दिया है। लेकिन जब तक सरकार मशीनों और मटेरियल पर रियायत नहीं देती। तब तक मशीन मेड कालीन से टक्‍कर ले पाना मुश्किल है।

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