वहीं इस तरह की कार्यवाई पर प्लांट मालिको ने रोष जताया और कहा है कि उन्हें मनको को पूरा करने के लिए समय मिलना चाहिए था
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GST के विरोध में कालीन उद्योग निकलेगा मार्च
विरोध में तेजी से एकजुट हो रहे कालीन निर्यातक
बुनकरों मजदूरों पर 18 फीसदी टैक्स पर उद्योग में विरोध
भदोही। जीएसटी को लेकर जहां देश भर में कपड़ा व्यापारी विरोध में हैं तो वहीं कालीन उद्योग में भी बुनकरों मजदूरों पर लगाये गए 18 फीसदी टैक्स का विरोध हो रहा है। सरकार द्वारा जीएसटी न हटाये जाने पर कालीन उद्योग ने विरोध में मार्च निकलने पर विचार किया है। 19 जुलाई को अखिल भारतीय कालीन निर्माता संघ के आह्वान पर कालीन निर्यातक भदोही शहर में कालीन भवन से तहसील तक विरोध मार्च निकलेंगे।
इसे लेकर अखिल भारतीय कालीन निर्माता संघ की एक बैठक हुई जिसमें उद्योग के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। बैठक में कालीन निर्माण की प्रक्रिया से जुड़े बुनकरों एवं मजदूरों पर 18 फीसदी की दर से आरोपित जीएसटी पर चिंता व्यक्त की गई। बैठक में निर्णय लिया गया कि बुनकरों, कारीगरों, मजदूरों पर जीएसटी वापस नही लिया गया तो उद्योग समाप्त हो जाएगा। ऐसे में उद्योग को बचाने के लिए जीएसटी के विरोध में मर्यादपट्टी स्थित कालीन भवन से भदोही तहसील तक निर्यातक मार्च निकलेंगे।
इस विरोध मार्च को लेकर कालीन उद्योग से जुड़े कालीन निर्यातक एकजुट हो रहे हैं। गौरतलब हो कि अभी तक तमाम मुद्दों का हल बैठकों से ही निकल जाता था लेकिन जीएसटी के कारण ऐसी स्थिति आ गयी है कि निर्यातकों को विरोध में मार्च का सहारा लेना पड़ रहा है। पहली बार युवा कालीन निर्यातक इस मुद्दे को लेकर एकजुट हैं और यह विरोध सोशल मीडिया से लेकर कालीन नगरी के गलियों में देखने को मिल रही है। विरोध में जगह-जगह बैनर पोस्टर भी लगा दिए गए हैं। ऐसे में जानकारों की माने तो इस मुद्दे पर सरकार को कालीन उद्योग के ऐसा कदम उठाया जाना चाहिए जिससे उद्योग को इस भारी-भरकम टैक्स से मुक्ति मिल सके। देश से दस हजार करोड़ के कालीनों का विदेशो में निर्यात हो रहा है जिसमे कालीन निर्यातकों का दावा है कि इसमें आधे से अधिक हिस्सा भदोही का होता है। इस उद्योग से बड़ी संख्या में लोगो को रोजगार मिला है और ऐसे में बुनकरों-मजदूरों पर जीएसटी थोपने से उद्योग का बड़ा नुकसान हो सकता है क्योंकि कालीन का कार्य गाँवो में इसे कुटीर उद्योग के रूप में किया जाता है।
पाक सरकार कर रही कालीन उद्योग को बढ़ाने की पहल
कालीन उद्योग में पड़ोसी देशों से आगे बढ़ने की तैयारी
पाक इण्टरनेशनल कारपेट फेयर के लिए सात करोड़ से अधिक
लाहौर। पाकिस्तान सरकार जल्द ही एक्सपोर्ट फोकस इण्डस्ट्री के लिए विशेष पैकेज की घोषणा करेंगे। वहां के उद्योग मंत्री पाकिस्तानी कालीन मेले के दौरान कहा कि जल्द ही कालीन उद्योग में दरों में कमी लाने के लिए टैरिफ और टैक्स सहित बिजली के दरों में •ाी कमी लायी जायेगी जिससे पाकिस्तानी कालीन उद्योग आस-पास के देशों का मुकबला कर सके। उन्होने अन्तार्राष्ट्रीय व्यापार के लिए कारपेट फेयरों को कारगर बताया। उन्होने ने कहा कि हैण्डनाटेड कारपेट इण्डस्ट्री की समस्या के समाधान के लिए डब्लूटीओ के अन्तर्गत आने वाले समस्याओं को सुलझाया जायेगा। इसमें फ्रीटेÑेड एग्रीमेंट, प्रोडक्ट डेवलपमेंट और रिसर्च को बढ़ावा दिया जायेगा। पाकिस्तानी कारपेट मैनुफैक्चररर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष ने सरकार से मांग की है कि कालीन उद्योग का अंतर्राष्ट्रीय इमेज में सुधार किया जाय जिससे बायर पाकिस्तान में अधिक आएं। पाकिस्तान के सूचना सांस्कृतिक व उद्योग मंत्री ने कहा कि पाकिस्तान दुनिया में अच्छी इमेज बनाना चाह रहा है और पाकिस्तानी निर्यातकों को शंघाई और डोमोटेक्स के अलावा लगने वाले मेले में •ाी •ााग लेने के लिए सहयोग किया जायेगा। उन्होने बताया कि पाकिस्तान में लगने वाले 33 वें इण्टरनेशनल कारपेट फेयर के लिए पाक सरकार ने 07 करोड़ 50 लाख का बजट दिया है।
चीन और ऑस्ट्रेलिया की ओर चले भारत के कारपेट निर्माता, नए बाजार की तलाश में इंडस्ट्री
नई दिल्ली। यूरोप और रूस से घटते निर्यात से परेशान भारतीय हैंड-मेड कारपेट इंडस्ट्री ने अब नए बाजारों की तलाश शुरू कर दी है। इंडस्ट्री का फोकस चीन, ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण अमेरिकी देशों की ओर है, जहां इंडस्ट्री को बेहतर डिमांड के साथ कारोबारी मौके हासिल हो रहे हैं। हालांकि यहां मुकाबला मशीन मेड कारपेट और फ्लोरिंग से है। जिनकी कीमत हैंड मेड कारपेट के मुकाबले 40 से 50 फीसदी कम हैं। ऐसे में पुराने मार्केट पर पकड़ बनाने के साथ कारोबारी नए मार्केट पर काबिज होने के लिए प्रॉडक्ट रेंज में बदलाव कर रहे हैं। कारोबारियों के अनुसार यूरोप, रूस और अमेरिका से हैंडमेड कारपेट एक्सपोर्ट डिमांड इस साल 20 से 30 फीसदी तक गिरी है। लेकिन नए मार्केट में भारतीय कालीन की डिमांड जिस तेजी से बढ़ रही है, उसे देखते हुए संभव है कि इंडस्ट्री पश्चिम में हुए नुकसान की भरपाई कर सके।


