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| TEHRAN – Some 6,500 overseas tourists toured Carpet Museum of Iran over the first nine month of the current Iranian calendar year, which started on March 21.
It drew over 4,000 domestic museumgoers during the cited period as well, the museum director Parisa Beyzaei told IRNA on Wednesday.
The number of foreign visits to the museum was about 4,000 in the same period last year, she added.
Covering an area of 3,400 square meters, the museum boasts a treasure trove of some 2,000 Persian carpets that date from the Safavid era onwards. It also puts on display a rich patchwork of rare and centuries-old rugs, kilims and tableau rugs.
Back in November, the museum was inscribed on the National Heritage List. It can be found at the northwest of Laleh Park in the heart of Tehran.courtesy by tehran times Carpet Museum draws 6,500 foreign travelers in 9 month
Carpet Museum of Iran puts spotlight on handwoven Baluchi products
The exhibit, which also embraces kilims and rugs along with variety of indigenous spreads and saddlebags, runs through Mar. 5, Mehr news agency reported on Sunday.
Baluchi rugs are usually all wool, but their material may also include goat and camel hair, cotton for whites, and in some cases a few knots of silk. The knotting is customarily asymmetrical.
Patterns of such carpets are highly varied, many consisting of repeated motifs, diagonally arranged across the field. Some present a maze of intricate latch-hooked forms.
Covering an area of 3400 square meters, the Carpet Museum of Iran is located on the northwest of Laleh Park in the heart of Tehran.
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Tehran - Carpet Museum draws 6,500 foreign travelers in 9 month
Are your cabinets and carpet emitting chemicals?
We feel safe in our homes, but that can be a false sense of security. The threat I’m talking about is something we can’t see: indoor air pollution. The air in our homes and workplaces can be more polluted than outdoor air in the most industrialized cities, according to the Environmental Protection Agency. The EPA says the problem is compounded by the fact that Americans spend 90 percent of their time indoors. Many different things can cause indoor air pollution, and they have a cumulative effect on our health.
When I was at “Good Morning America,” I asked Greenguard to test furniture for a baby’s nursery for a story. The rocker we tested put off seven times as much formaldehyde as the state of California considers safe. The paint contained five times the amount of chemical gases as the recommended limit. And more than 100 chemicals wafted from the crib mattress — some of them alcohols and industrial solvents.- By Elisabeth Leamy | The Washington PostAre your cabinets and carpet emitting chemicals?
40 मजदूर होने पर ही यूनिट पर लागू होगा कारखाना अधिनियम
योगी सरकार ने जहां निर्माण कार्यों में लगे मजदूरों के पंजीयन शुल्क को कम कर दिया है, वहीं उत्पादन यूनिट लगाने वाले लघु उद्यमियों के लिए भी राहत प्रदान कर दी है।
भदोही कालीन उद्यमी ने GST का विरोध में मार्च निकाला
बड़ी संख्या में निर्यातक और मजदूर ने मार्च में
विरोध कर विरोध जताया
भदोही शहर के मर्यादपट़टी स्थित अखिल भारतीय कालीन निर्माता संघ के कार्यालय से निकाला गया यह विरोध मार्च भदोही तहसील पहुंच कर समाप्त हुआ। यहां मार्च में शामिल विभिन्न कालीन उद्याेग से जुड़े संगठनों ने कालीन उद्योग से जीएसटी हटाने के लिए केन्द्र सरकार को संबोधित मांग पत्र उप जिलाधिकारी को सौंपा। जीएसटी को हटाने की मांग कर रहे कालीन उद्याेग से जुड़े संगठनों का आरोप है कि पहले कभी भी कालीन उद्योग पर किसी प्रकार का टैक्स नहीं था लेकिन कालीन उद्योग और इससे जुड़े बुनकरों मजदूरों पर जीएसटी में 18 फीसदी टैक्स लगाया गया है जिससे कालीन उद्योग का बड़ा नुकसान होगा। बुनकरों मजदूरों की मजदूरी कम हो जायेगी वहीं उत्पादन पर लागत अधिक बढ़ेगा जिससे निर्यात में कमी आने की पूरी संभावना है। विरोध मार्च में शामिल अखिल भारतीय कालीन निर्माता संघ, कालीन निर्यात संवर्धन परिषद सहित कई संगठनों और बुनकरों मजदूरों की मांग किया कि जल्द से जल्द कालीन उद्योग पर लगाए गए जीएसटी को वापस लिया जाय। हस्तनिर्मित कालीन के हस्तशिल्पियों, बुनकरों और मजदूरों पर आरोपित 18 फीसदी जीएसटी के विरोध में मार्च निकला जिसमे भरी संख्य में उद्यमी शामिल हुए । एकमा के बैनर तले आयोजित इस मार्च के माध्यम लोग gst का विरोध कर रहे थे भदोही में आयोजित विरोध मार्च में सीईपीसी चेयरमैन महावीर प्रसाद शर्मा उर्फ राजा शर्मा भी भाग लिया विरोध को लेकर कालीन नगरी में जगह बैनर दिखाई पड़ रहे है।दिनांक: 19.07.2017
ज्ञापन
प्रतिष्ठा में,
श्री नरेन्द्र मोदी जी,
माननीय प्रधान मंत्री,
भारत सरकार,
152, साउथ ब्लाक, रेसिना हिल,
नई दिल्ली-110011
मान्यवर,
यह ज्ञापन हस्तनिर्मित कालीन एवं दरी उद्योग से जुड़े लाखों बुनकरों एवं कारीगरों की ओर से प्रेषित किया जा रहा है । हम बुनकर एवं कारीगर कालीन उद्योग में कई पीढ़ियों से कालीन बुनाई एवं निर्माण कार्य करके अपनी आजीविका चलाते रहे है । हमारा यह कार्य हमारे गाँवों में, घर-घर में स्त्री, पुरूष, युवा एवं बृद्ध सभी के द्वारा होता है ।
कालीन निर्माण विभिन्न छोटी-छोटी प्रक्रियाओं से होकर गुजरता है ओर यह एक पूर्णतः ग्रामीण रोजगार आधारित कुटीर उद्योग है ।
हमें ज्ञात हुआ है कि भारत सरकार द्वारा जी0एस0टी0 के अन्तर्गत कालीन निर्माण कार्य पर 18 प्रतिशत जी0एस0टी0 लागू किया है, जो कि अत्यन्त दुर्भाग्यपूर्ण है । यह उद्योग खादी उद्योग एवं कृषि उद्योग के समान है । कालीन निर्माण प्रक्रिया पर यदि 18 प्रतिशत जी0एस0टी0 लागू किया गया तो निश्चय ही यह उद्योग समाप्त हो जाएगा । स्वतंत्रता के 70 साल में आज तक हस्तनिर्मित कालीन बुनाई एवं निर्माण कार्य पर कोई टैक्स नहीें लगाया गया, क्योंकि यह एक परम्परागत कुटीर हस्तकला उद्योग है ।
ऽ इस उद्योग से जुडे़ व्यापारी, निर्माता, निर्यातक भी अधिकांशतः सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम श्रेणी की इकाईयाँ है, जो कि इस टैक्स का भार वहन करने में सक्षम नहीं हैं । यदि हस्तनिर्मित कालीन निर्माण की प्रक्रिया पर जी0एस0टी0 लगाया गया तो यह उद्योग के लिए अत्यन्त घातक होगा एवं लाखों बुनकर, कारीगरों एवं उनके परिवारों के सामने रोजी-रोटी का संकट उत्पन्न हो जाएगा ।
ऽ जी0एस0टी0लागू होने के पूर्व हस्तनिर्मित कालीन निर्माण उद्योग पर कोई भी टैक्स नहीं लगता था जैसे-
ऽ उत्पाद शुल्क
ऽ सेवा कर
ऽ व्यापार कर
किन्तु जी0एस0टी0 कानून के अन्तर्गत हस्तनिर्मित कालीन की बिक्री पर 12 प्रतिशत एवं निर्माण कार्यो पर 18 प्रतिशत जी0एस0टी0 लगा है, जो कि सर्वथा गलत है ।
(2)
हम सभी बुनकर एवं कारीगर जी0एस0टी के अन्तर्गत कालीन बुनाई, कटाई, फिनीशिंग, घुलाई इत्यादि उत्पादन सम्बन्धित कार्यो पर लगे 18 प्रतिशत टैक्स का प्रबल विरोध करते है एवं इसे तत्काल प्रभाव से समाप्त करने की मांग करते है जिससे कि 20 लाख से ज्यादा बुनकरों, कारीगरों एवं उनके परिवारों की रोजी-रोटी की रक्षा हो सके ।
हस्तनिर्मित कालीन एवं दरी का शतप्रतिशत निर्यात होता है एवं इसे भारी अन्तर्राष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ता है । जी0एस0टी0 लगने से हमारे कालीन एवं दरी की उत्पादन लागत पर विपरीत प्रभाव पड़ेगा जिससे कि हमारा निर्यात घटेगा ।
हस्तनिर्मित कालीन उद्योग उत्तर प्रदेश क पूर्वांचल के 20 से ज्यादा जिलों में फैला है एवं भारत के अन्य राज्यों में भी कालीन बुनाई का कार्य होता है । जी0एस0टी0लागू होने से ये सभी क्षेत्र बुरी तरह से प्रभावित होगें ।
हमें आशा है कि हमारा निवेदन स्वीकार किया जाएगा एवं हमें 18 प्रतिशत जी0एस0टी0 (जाब वर्क पर आरोपित) से मुक्ति मिलेगी ।
समस्त हस्तनिर्मित कालीन बुनकर एवं मजदूर
प्रतिलिपि सूचनार्थ एवं आवश्यक कार्यवाहीे हेतु प्रेषित:-
1. श्री अरूण जेटली जी, माननीय वित्त मंत्री, भारत सरकार, रूम0न0134, नार्थ ब्लाक, नई दिल्ली-110 001 ।
2. श्रीमती स्मृति जुबिन ईरानी, मा0 वस्त्र मंत्री, भारत सरकार, उद्योग भवन, नई दिल्ली-110 001 ।
3. श्रीमती निर्मला सीतारमन, माननीया वाणिज्य एवं उद्योग राज्य मंत्री,भारत सरकार, ‘उद्योग भवन’, नई दिल्ली-110 011 ं
4. श्री बंडारू दत्तात्रेय, माननीय श्रम मंत्री, भारत सरकार,रूम न0ं 120, श्रम शक्ति भवन, रफी मार्ग, नई दिल्ली-110 001 ।
GST के विरोध में कालीन उद्योग निकलेगा मार्च
विरोध में तेजी से एकजुट हो रहे कालीन निर्यातक
बुनकरों मजदूरों पर 18 फीसदी टैक्स पर उद्योग में विरोध
भदोही। जीएसटी को लेकर जहां देश भर में कपड़ा व्यापारी विरोध में हैं तो वहीं कालीन उद्योग में भी बुनकरों मजदूरों पर लगाये गए 18 फीसदी टैक्स का विरोध हो रहा है। सरकार द्वारा जीएसटी न हटाये जाने पर कालीन उद्योग ने विरोध में मार्च निकलने पर विचार किया है। 19 जुलाई को अखिल भारतीय कालीन निर्माता संघ के आह्वान पर कालीन निर्यातक भदोही शहर में कालीन भवन से तहसील तक विरोध मार्च निकलेंगे।
इसे लेकर अखिल भारतीय कालीन निर्माता संघ की एक बैठक हुई जिसमें उद्योग के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। बैठक में कालीन निर्माण की प्रक्रिया से जुड़े बुनकरों एवं मजदूरों पर 18 फीसदी की दर से आरोपित जीएसटी पर चिंता व्यक्त की गई। बैठक में निर्णय लिया गया कि बुनकरों, कारीगरों, मजदूरों पर जीएसटी वापस नही लिया गया तो उद्योग समाप्त हो जाएगा। ऐसे में उद्योग को बचाने के लिए जीएसटी के विरोध में मर्यादपट्टी स्थित कालीन भवन से भदोही तहसील तक निर्यातक मार्च निकलेंगे।
इस विरोध मार्च को लेकर कालीन उद्योग से जुड़े कालीन निर्यातक एकजुट हो रहे हैं। गौरतलब हो कि अभी तक तमाम मुद्दों का हल बैठकों से ही निकल जाता था लेकिन जीएसटी के कारण ऐसी स्थिति आ गयी है कि निर्यातकों को विरोध में मार्च का सहारा लेना पड़ रहा है। पहली बार युवा कालीन निर्यातक इस मुद्दे को लेकर एकजुट हैं और यह विरोध सोशल मीडिया से लेकर कालीन नगरी के गलियों में देखने को मिल रही है। विरोध में जगह-जगह बैनर पोस्टर भी लगा दिए गए हैं। ऐसे में जानकारों की माने तो इस मुद्दे पर सरकार को कालीन उद्योग के ऐसा कदम उठाया जाना चाहिए जिससे उद्योग को इस भारी-भरकम टैक्स से मुक्ति मिल सके। देश से दस हजार करोड़ के कालीनों का विदेशो में निर्यात हो रहा है जिसमे कालीन निर्यातकों का दावा है कि इसमें आधे से अधिक हिस्सा भदोही का होता है। इस उद्योग से बड़ी संख्या में लोगो को रोजगार मिला है और ऐसे में बुनकरों-मजदूरों पर जीएसटी थोपने से उद्योग का बड़ा नुकसान हो सकता है क्योंकि कालीन का कार्य गाँवो में इसे कुटीर उद्योग के रूप में किया जाता है।
जम्मू कश्मीर:हस्तशिल्प को बढ़ावा देगी सरकार
जम्मू कश्मीर। जम्मू कश्मीर में उद्योग को बढ़ावा देने क लिए सरकार कई पहल करने जा रही है। जेके के वाणिज्य मंत्री चन्द्र प्रकाश ने कहा कि हस्तशिल्प उद्योग को बढ़ाने के लिए कारीगरों को लोन आदि की सुविधा उपलबध करायी जायेगी। उन्होने कहा कि आधुनिक तकनीक की लूम व उन्हे सीखने के लिए आईआईसीटी व आईसीडी जैसी संस्थाएं •ाी विकसित की जायेंगी साथ ही मशीन आदि की खरीद करने पर सब्सिडी •ाी दी जायेगी।





